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उपेक्षा से फूटा विधायक का गुस्सा तो अधिकारी पर फोड़ा ठीकरा

  • पशुपालन विभाग ने अपने अधिकारी को किया एपीओ
  • जिला कलक्टर या मेला प्रभारी की जिम्मेदारी तक तय नहीं की

सिरोही. पशुपालन विभाग में संयुक्त निदेशक का पद संभाल रहे रेवदर के अधिकारी को तत्काल प्रभाव से एपीओ किया गया है। आदेशों की प्रतीक्षा में रखते हुए उनका मुख्यालय जयपुर कर दिया है। उन्हें आबू-पिण्डवाड़ा विधायक समाराम गरासिया की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा है। शनिवार को मंडार में शुरू हुए लीलाधारी पशु मेले में पहुंचे विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज थे। गुस्सा जाहिर करने पर विभाग ने अपने अधिकारी पर ठीकरा फोड़ मामला शांत करने का प्रयास किया है।

विधायक जिलास्तरीय कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ निकल गए थे। विधायक की नाराजगी को देखते हुए पशुपालन विभाग ने कार्यवाहक संयुक्त निदेशक डॉ.अमितकुमार को एपीओ कर दिया। अब कामठे चांगदेव सोपान को संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। यह दिलचस्प रहा कि इस प्रकरण में जिला कलक्टर या मेला प्रभारी रहे अधिकारी की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई।

जिला कलक्टर ने नहीं दी प्रतिक्रिया
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला कलक्टर वहीं मौजूद थीं। विधायक से पहले उनका सम्मान किया गया। विधायक ने अपनी उपेक्षा को लेकर जिला कलक्टर से बातचीत भी की, लेकिन उनकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। लिहाजा विधायक नाराज होकर चले गए।

इसलिए उपेक्षा से क्षुब्ध दिखे विधायक
उल्लेखनीय है कि लीलाधारी पशु मेले में आए विधायक समाराम गरासिया ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना रहा कि प्रोटोकॉल के लिहाज से उनका जो सम्मान होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। उनका आरोप था कि वे चार बार के विधायक हैं एवं अपनी सरकार में ही पहली बार इतनी उपेक्षा झेली जितनी कांग्रेस के ्रशासन काल में भी कभी नहीं हुई।

आखिर किसकी शह पर प्रारंभिक बदलाव
वैसे जिलास्तरीय पशु मेले को देखते हुए रेवदर में कार्यरत उप निदेशक को जिला मुख्यालय पर संयुक्त निदेशक का कार्यभार सौंपा गया। मेले में मामला बिगड़ा तो एपीओ कर दिया। अब जिनको संयुक्त निदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है वे पहले से ही मुख्यालय पर कार्यरत हैं। जब उप निदेशक स्तर के अधिकारी पहले ही संयुक्त निदेशक कार्यालय में कार्यरत थे तो रेवदर में पदस्थापित अधिकारी को कार्यभार सौंपने के पीछे क्या औचित्य था, यह समझ से परे ही है। प्रारंभ में कार्यभार का बदलाव किसकी शह पर हुआ यह कहना मुश्किल है।

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