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किनारों पर आ के डूब गए, जो कह रहे थे समुंदर है सब खंगाले हुए

  • सीएम के भाषण के दौरान ही जा रहे लोगों को थाम नहीं पाए
  • तो क्या यह भाजपा की विफलता रही या प्रशासनिक कमजोरी

सिरोही. वो लोग भी किनारों पर आ के डूब गए, जो कह रहे थे समुंदर है सब खंगाले हुए… तारीक कमर का यह शेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सिरोही सभा में सटीक बैठता नजर आया। जिस भीड़ को बड़ी मेहनत से एकत्र किया गया था वे लोग ऐन वक्त पर खिसकते नजर आए। इनको कोई थामे नहीं रख पाया। भाजपा पदाधिकारी इसमें भूमिका जरूर निभा सकते थे, लेकिन वे खुद दर्शक बने हुए थे। कुछ मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचाने की होड़ में रहे तो कुछ पुलिस के धक्कों से कतारों में लगे दिखे। कुल जमा यही कि मुख्यमंत्री की सभा में जिन पर भीड़ लाने एवं भीड़ थामे रखने का जिम्मा था वे विफल साबित हुए। अब देखना होगा यह ठीकरा किस पर फूटता है।

ऐन वक्त पर सब कुछ बिगड़ गया
मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए भाजपा के साथ ही जिला प्रशासन ने भीड़ एकत्र करवाई थी। यह भीड़ प्रशासनिक व्यवस्थाओं में शुमार थी। इसलिए कि गांवों से लोगों को लाने व ले जाने की जिम्मेदारी सरकारी कारिंदों को सौंपी गई थी। भाजपा ने भी अपने पदाधिकारियों को इसी तरह का दायित्व सौंपा था, लेकिन ऐन वक्त पर सब बिगड़ गया और उठकर जाने लगे।

सीएम आए और लोग उठकर जाने लगे
मुख्यमंत्री की सभा के लिए भीड़ एकत्र की गई थी और उनके भाषण के दौरान ही लोग उठकर जाने लगे तो क्या हो, लेकिन ऐसा ही हुआ। मंच पर मुख्यमंत्री भाषण दे रहे थे और लोग एक-एककर जाने लगे। इनको थामे रखने के लिए पुलिस ने प्रयास किए पर कोई नहीं माना। मुख्यमंत्री का भाषण शुरू होते-होते लगभग आधा पांडाल खाली हो चुका था।

मुख्यद्वार बंद कर भीड़ रोकने का प्रयास
उधर, लोगों को रोके रखने के लिए पुलिस ने मुख्यद्वार बंद कर दिया, लेकिन नतीजा नहीं निकला। लोग चारदीवारी कूदकर भी बाहर निकले। माना जा रहा है कि दूर-दराज से आए लोग दोपहर तक उकता गए थे। पाली व जालोर के सुदूर इलाकों से सिरोही आए लोग संभवतया अलसुबह उठे होंगे, लेकिन दोपहर तक भी चाय-नाश्ता नसीब नहीं हुआ। परेशान हाल लोग उठकर पांडाल से निकलने लगे।

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