गुजरात के लिए तस्करी हो रही सरकारी ठेकों की शराब
- मैथीपुरा जैसे गांवों के शराब ठेकों से लगातार भरे जा रहे वाहन
- तस्करी के बीच जिम्मेदारों को मूकदर्शक माने या मौन स्वीकृति
सिरोही. गुजरात सीमा से सटे मैथीपुरा जैसे गांवों के शराब ठेकेदार तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं। करोड़ों रुपए में उठ रहे ठेकों की शराब आसानी से गुजरात पहुंच रही है। बताया जा रहा है कि यह सब आबकारी महकमे की मौन स्वीकृति में चल रहा है। आबकारी के निरीक्षक व थानों के प्रहराधिकारी अपने टारगेट पूरे करने के लिए भी हथकढ़ पकडऩे तक ही सीमित है। तस्करी के मामले बढऩे के बावजूद यह कहना मुश्किल है कि जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं या मौन स्वीकृति है। वैसे आबकारी महकमे के अधिकारी इन मामलों में बात करने से भी कतरा रहे हैं।
इसलिए सीधे गुजरात जा रही शराब
सरकारी ठेकों पर राजस्थान में बिक्री के लिए निर्मित शराब ही बेची जा सकती है। ठेकेदारों को इसके लिए सरकारी गोदाम से माल लेना पड़ता है। ठेकों के नाम से उठाया गया माल वे कहां खपाते है यह उनको देखना है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्र के ठेकों से माल सीधा गुजरात के लिए जा रहा है।
ठेकों पर नहीं हो रही निगरानी
सरकारी ओर से आवंटित शराब ठेकों को नियमों तहत संचालित करना होता है। इसके लिए आबकारी महकमे को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन ठेकों पर समुचित निगरानी नहीं हो रही। बताया जा रहा है कि गोदाम से शराब उठाव करने एवं राजस्व अर्जन की खातिर महकमे के अधिकारी माल की खपत को लेकर मूकदर्शक ही बने रहते हैं।
सामने आ चुके हैं ऐसे मामले भी
आमतौर पर पंजाब, हरियाणा व अरूणाचलप्रदेश में बिक्री के लिए निर्मित शराब भारी मात्रा में गुजरात पहुंचती है। लेकिन, ठेकों में बिकने के लिए लाई गई राजस्थान की शराब भी आसानी से तस्करी हो रही है। हाल ही में इस तरह के मामले सामने भी आ चुके हैं। पुलिस कार्रवाई में राजस्थान में बिक्री के लिए निर्मित शराब पकड़ी जा चुकी है।



