
- पिण्डवाड़ा में कमलेश मेटाकास्ट परियोजना रद्द करने की मांग
- खनन परियोजना के विरोध में 28 को करेंगे जन आंदोलन
सिरोही. राष्ट्रीय पशुपालक संघ अध्यक्ष लालजी राइका ने कहा कि जो चीज जनता को स्वीकार नहीं है वह सरकार को भी स्वीकार नहीं होनी चाहिए, लेकिन सरकारें जन बल के बजाय धन बल की पक्षधर है। यही कारण है कि पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना कमलेश मेटाकास्ट के लिए जनता की सुनवाई नहीं हो रही।
उन्होंने कहा कि जल-जमीन व जंगल को बचाने की इस लड़ाई में पूरी जनता एकजुट है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार को लिखकर भेजा है कि इस परियोजना को रद्द किया जाए, लेकिन सरकार नहीं सुन रही। स्पष्ट है कि धनबलियों को फायदा देने के लिए सरकार इस परियोजना को लागू करना चाह रही है, लेकिन इसे किसी भी सूरत में लागू नहीं होने देंगे। वे गुरुवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में 28 जनवरी को जन आंदोलन किया जाएगा। इस सम्बंध में उन्होंने अपनी मांगों को दोहराया तथा सरकार से इन पर समय रहते कार्य किए जाने की मांग रखी। इस दौरान संघ के युवा विंग अध्यक्ष भरत सराधना, जिलाध्यक्ष सवाराम, तुषार पुरोहित समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
चारागाह में फैक्ट्री कैसे दे रहे हैं
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस चारागाह भूमि पर आप किसी को घर बनाकर नहीं दे सकते उस पर खनन की अनुमति कैसे दी जा रही है। जनता को बेघर कर फैक्ट्रियां खोली जा रही है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की जायज मांगों के लिए वे हमेशा साथ रहे हैं। इस मामले में भी वे जनता के साथ हैं एवं ग्रामीणों की मांगों को नहीं माना गया तो अनिश्चितकालीन आंदोलन चलेगा।
सरकार ने मजबूती से पक्ष नहीं रखा
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस परियोजना को लागू होने देने में पूरी सरकार की पूरी भूमिका रही है। ट्रिब्यूनल हो या न्यायालय, जहां कहीं भी इस परियोजना की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा। जनता की ओर से सरकार ने ठोस पैरवी नहीं की, जिससे आदिवासी लोगों के घर व जमीन बर्बाद हो रही है। परियोजना लागू होने पर लोगों के घर, खेत व पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।



