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पिण्डवाड़ा को छोड़ सरूपगंज पकड़ते तो आठ माह खराब न होते

  • खारिज होने पर भी निरंतर पिण्डवाड़ा के लिए पत्राचार करते रहे
  • यह लाइन नकारने के कारण सरूपगंज नाम से रखी नई मांग

सिरोही. जिला मुख्यालय को रेल लाइन से जोडऩे के मुद्दे पर सांसद लुम्बाराम चौधरी ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने स्वीकारा कि पूर्ववर्ती सांसद के पत्राचार और पिण्डवाड़ा-सिरोही-बागरा लाइन को मिले इनकार से उन्हें सबक लेना चाहिए था। ऐसा करते तो उनके आठ माह खराब नहीं होते।

उन्होंने बताया कि वे सांसद बनने के बाद से ही इस लाइन पर सर्वे के लिए लगातार पत्राचार करते रहे, लेकिन बार-बार एक ही जवाब मिला कि लाभकारी नहीं होने से इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इस लाइन को नकारने के बाद नए सिरे से पत्राचार किया गया और इसमें बागरा-सिरोही को सरूपगंज से जोडऩे की बात कही गई। नए नाम और नई मांग होने से कार्य आगे बढ़ा और फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) के लिए करीब ढाई करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हुआ।

राजनीतिक दबाव में बदलाव का आरोप
उधर, पिण्डवाड़ा जन संघर्ष समिति की ओर से प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। इसमें बताया गया है कि वर्ष-2016-17 में उदयपुर के खरवाचंदा से पिण्डवाड़ा-सिरोही-बागरा के लिए डीपीआर तैयार थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में इस लाइन को सरूपगंज होते हुए करवाया जा रहा है। इसी बदलाव को लेकर संघर्ष समिति विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

जन प्रदर्शन से पहले जनप्रतिनिधियों ने रखा पक्ष
सिरोही जिला मुख्यालय को रेल लाइन से जोडऩे की मांग अर्से से चल रही है। संघर्ष समिति के तत्वावधान में चल रहे प्रदर्शन को जनता का समर्थन मिलने की उम्मीद है। लिहाजा सत्ताधारी दल पहले से ही अपना पक्ष रखना चाह रहे हैं। यही कारण रहा कि जन संघर्ष समिति की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन से दो दिन पहले ही सांसद लुम्बाराम चौधरी व पिण्डवाड़ा विधायक समाराम गरासिया ने अपना पक्ष रखा। उनका कहना रहा कि दलगत राजनीति के चक्कर में कुछ लोग जनता को भ्रमित कर रहे हैं।

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