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मंत्री के सामने रखी पीड़ा, कहा अधिकारी सुनते ही नहीं

  • आरोप लगाया लचर स्वास्थ्य सेवाओं से दुखी हो रहे लोग
  • सुनवाई नहीं होने से भाजपा पदाधिकारी भी हो रहे क्षुब्ध

सिरोही. लचर हो रही जिले की स्वास्थ्य सेवाओं से लोग दुखी हो रहे हैं। अधिकारियों को कहने के बावजूद न तो व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है और न सुनवाई हो रही है। ऐसे में भाजपा पदाधिकारी भी क्षुब्ध नजर आ रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्रसिंह के सिरोही आगमन पर पदाधिकारियों ने इन समस्याओं की जानकारी दी तथा समाधान की मांग रखी।

पीएमओ को पाबंद करने की मांग
राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी सदस्य लोकेश खंडेलवाल ने जिला अस्पताल में रोगियों को उचित सुविधा देने एवं कमियों में सुधार के लिए पीएमओ को पाबंद किए जाने की मांग रखी। बताया कि अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण रोगियों को समस्या हो रही है। उपचार के अभाव में रोगियों को रैफर किए जाने की भी अक्सर शिकायतें आ रही है, जो चिंता का विषय है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग रखी
आरएमआरएस सदस्य लोकेश खंडेलवाल ने बताया कि जिला चिकित्सालय में अधिकतर चिकित्सक समयावधि के दौरान ही सीट से नदारद रहते हैं। निशुल्क जांच योजनाओं में समुचित एवं आवश्यक जांच सेवाओं का अभाव है। सोनोग्राफी व स्किन जैसे विभागों में डॉक्टर नहीं है। पीएमओ की अनदेखी से अस्पताल के बाहर ही एम्बुलेंस माफिया सक्रिय है। बायोवेस्ट निस्तारण में नियमों की अनदेखी की जा रही है। टंकियों में गंदगी व मॉनिटरिंग का अभाव होने से लोग गंदा पानी पी रहे हैं। पर्ची काउंटर, रजिस्ट्रेशन कक्ष, भर्ती टिकट आदि बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। भारी-भरकम मासिक खर्च के बावजूद अस्पताल में सुविधा बहाल नहीं हो रही है। इसकी उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है। अधिकारियों की उदासीनता से लोगों को मुश्किल हो रही है, वहीं, सरकार की योजनाओं का भी लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा।

निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग रखी
उधर, जिला परिषद सदस्य दिलीपसिंह मांडाणी ने मांडोली (रामसीन-जालोर) के गणपतसिंह हत्याकांड मामले में सेवानिवृत्त न्यायाधीश से मामले की जांच कराए जाने की मांग रखी। ज्ञापन में बताया कि परिजनों के चार बार धरने पर बैठने के बाद डेढ़ साल बाद मामले का खुलासा किया गया। इसमें निष्पक्ष न्यायिक जांच की दरकार है। वहीं, मृतक के परिजनों को राहत देने की भी मांग रखी। ज्ञापन में बताया कि कम से कम एक करोड़ रुपए का मुआवजा व बच्चों के बालिग होने पर सरकारी नौकरी की मांग रखी।

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