
- मंत्री व सांसद की वीआईपी खातिरदारी में मशगूल प्रशासन
- एक ही टेबल पर आमने-सामने रखी प्लेट्स में असमानता
सिरोही. इसे सत्ता की ठसक ही कहा जाएगा कि ये काजू-बादाम जीम रहे हैं और अन्यों को सिर्फ समोसा। एक ही टेबल पर आमने-सामने लगी प्लेट्स में बड़ी असमानता रही पर न तो मंत्री ने सवाल खड़ा किया और बदलाव हुआ। मंत्री की प्लेट में जब काजू-बादाम परोसे गए हो तो सामने बैठे पत्रकार या अधिकारियों की प्लेट में भले ही समोसा आ जाए, क्या फर्क पड़ता है। कहने को सांसद लुम्बाराम चौधरी (Lumbaram choudhary) भी सादगी पसंद व धरातल से जुड़े हुए हैं पर इनकी प्लेट में भी वहीं ठसक नजर आई। हां, सामने सिर्फ समोसा ही था इस पर उनकी भी नजर नहीं गई।
वीआईपी प्लेट में वीआईपी नाश्ता
यहां जिला परिषद सभागार में प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई (KK bishnoi) ने बजट घोषणाओं को लेकर पत्रकारों से बातचीत की। इसके तत्काल बाद ही जिलास्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली गई। इसमें पत्रकारों व अधिकारियों को कागज की प्लेट्स में मिठाई का एक पीस व समोसा दिया गया। वहीं, मंत्री की प्लेट में काजू-बादाम, मिठाई, समोसा, वैफर आदि परोसे गए। इनकी प्लेट भी कागज की नहीं वरन् वीआईपी रही।
पहले खिलाते रहे हैं चना-मूंगफली
मेहमाननवाजी के मामले में जिला प्रशासन हर बार पक्षपात करता नजर आ रहा है। पूर्व में भी इसी तरह से काजू-पिस्ता व बादाम परोसे जा चुके हैं। वहीं, बैठक का हिस्सा बने अधिकारियों को चना-मूंगफली खिलाए गए। यहां तक कि अधिकारियों को पानी पिलाने के लिए जो यूज एंड थ्रो वाली बोतलें दी जा रही हैं वह भी खाली होने के बाद कैम्पर से वापस भरकर लाई जाती रही है।
काजू-बादाम के स्वाद ने होंठ सी दिए
भाजपा जहां एक तरफ वीआईपी कल्चर को खत्म करने की बात कहती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद यह कल्चर जकड़ ही लेता है। अब यह समझ से परे है कि जिला प्रशासन इनकी खातिरदारी को लेकर असमानता क्यों बरत रहा है। मंत्री-सांसद व आला अधिकारियों के जलपान एवं अन्य अधिकारियों व पत्रकारों के जलपान में भेदभाव सामने दिख रहा होने के बावजूद इस असमानता पर न तो मंत्री ने कुछ बोला और न किसी अन्य ने। शायद काजू-बादाम के स्वाद ने इनके होंठ सी दिए।



