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सरकार सिरोही आई पर कोई सौगात नहीं मिल पाई

  • संगठनात्मक कमजोरी के कारण नहीं ले सके कोई सौगात
  • सरकार को समस्या बताते तो कोई घोषणा कर ही जाते

सिरोही. निसंदेह यह बड़ी सौगात रही कि सरकार खुद सिरोही आई, लेकिन सिरोही को कोई सौगात नहीं मिल पाई। इसे संगठनात्मक कमजोरी ही कहा जाएगा कि अपने वक्तव्यों में किसी वक्ता ने यहां के लिए कोई मांग नहीं रखी। माना जा रहा है कि सरकार के सामने कोई समस्या रखी जाती तो कोई न कोई सौगात भी जरूर मिलती। अब न तो किसी वक्ता ने मांग रखी और न किसी ने समस्या बताई। लिहाजा मुख्यमंत्री सिरोही आए और चले भी गए, लेकिन जिले को कोई बड़ी घोषणा या सौगात नहीं मिल पाई।

ठेठ देहाती अंदाज ने महफिल लूट ली
भीनमाल से पूर्व विधायक रहे पूराराम ने जरूर माही का पानी यहां तक लाने का मांग पत्र मुख्यमंत्री को देने की बात कही। अधिकतर वक्ताओं में से पूर्व विधायक पूराराम का वक्तव्य खासा दमदार रहा मानों वे पूरी महफिल ही लूट ले गए। देसी अंदाज में ठेठ देहाती गीत सुनाते हुए सिरोही का गुणगान किया। वहीं, प्रदेश के कद्दावर नेता रहे भैरोसिंह शेखावत, विजयाराजे सिंधिया से अपनी नजदकियों का भी उल्लेख किया। उनके वक्तव्य के दौरान पांडाल में तालियां गूंजती रही।

धक्कों से बचाने वाला कोई न दिखा
अपने दम पर लोगों को एकत्र कर सभा में लाने वाले कुछ भाजपा पदाधिकारी सुरक्षाकर्मियों के धक्के खाते नजर आए। वे यहां तक कि वे पांडाल तक पहुंचे भी, लेकिन अपेक्षित लोगों की सूची में नाम नहीं होने से इनको दूर धकेल दिया गया। इनकी पैरवी के लिए कोई बड़ा पदाधिकारी भी यहां तक नहीं पहुंचा। समुचित सम्मान नहीं मिलने से धक्के खाने वाले पदाधिकारी नाराज से दिखे। इसमें संगठन के विभिन्न मोर्चा व प्रकोष्ठ के जिलास्तरीय पदाधिकारी भी शामिल रहे।

ज्ञापन लेकर खड़े रहे लोग मिलने को तरसे
मुख्यमंत्री ने सिरोही में केवल दो किमी की दूरी ही सडक़ मार्ग से तय कर पाए। वे हवाई पट्टी से सभा स्थल एवं यहां से वापस हवाई पट्टी गए। ऐसे में उनको वहीं सब कुछ नजर आया, जो अधिकारी व भाजपाई दिखाना चाह रहे थे। जनता अपनी समस्याओं के पुलिंदें लेकर इस रास्ते में खड़ी भी रही, लेकिन न तो किसी ने समस्या सुनी और न मिलने दिया गया।

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