
- जन संघर्ष समिति ने सांसद के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
- प्रभाव और रसूख के दबाव में सर्वे लाइन बदलने का आरोप
सिरोही. पिण्डवाड़ा जन संघर्ष समिति ने शनिवार को प्रदर्शन करते हुए जिला मुख्यालय को रेल से जोडऩे के लिए पिण्डवाड़ा होते हुए सर्वे करवाए जाने की मांग रखी है। समिति के तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर वाहन रैली निकाली गई। साथ ही जिला प्रशासन को रेल मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कलक्ट्री में आयोजित जनसभा में वक्ताओं ने सांसद लुम्बाराम चौधरी को खरी-खरी सुनाई।
समिति का कहना रहा कि सांसद ने सरूपगंज होते हुए सिरोही को बागरा से जोडऩे का सर्वे करवाने का प्रस्ताव भेजा है, जबकि सिरोही को बागरा से जोडऩे के लिए पिण्डवाड़ा होते हुए पूर्ववत प्रस्तावित सर्वे ही रखे जाने की दरकार है। समिति ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर पिण्डवाड़ा को दरकिनार किया जा रहा है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आर्थिक रूप से या यात्री भार के लिहाज से पिण्डवाड़ा हर मामले में सरूपगंज से कई गुना आगे है। ऐसे में पिण्डवाड़ा-सिरोही-बागरा को निरस्त कर सरूपगंज-सिरोही-बागरा के लिए सर्वे करवाना पूरी तरह गलत है। जन संघर्ष समिति ने सिरोही मुख्यालय को जोडऩे के लिए पूर्ववत पिण्डवाड़ा होते हुए ही सर्वे कराए जाने की मांग रखी। ऐसा नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सांसद किसी दबाव में काम कर रहे हैं
जन संघर्ष समिति की ओर से शहर में वाहन रैली निकालते हुए प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सांसद लुम्बाराम चौधरी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह केंद्र सरकार का मामला है और हमने सांसद को यहां से भेजा है तो हमारी पैरवी करनी चाहिए, लेकिन वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। आरोप लगाया कि प्रभाव या किसी अन्य दबाव में पिण्डवाड़ा से सिरोही की लाइन को बदलवा कर सरूपगंज से सिरोही करवाना चाह रहे है।
अब जनता चुप बैठने वाली नहीं है
जन संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि हमारा हक छीनने का प्रयास किया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। सांसद हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए जनभावनाओं के अनुरूप काम करते हुए उन्हें रेल मंत्रालय तक हमारी बात पहुंचानी चाहिए। वे किसी दबाव में काम करेंगे तो जनता भी चुप बैठने वाली नहीं है।
जल-जगल व जमीन उजाडऩे की तैयारी
आरोप लगाया गया कि सरूपगंज क्षेत्र में कमलेश मेटाकास्ट नाम से प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ही सरूपगंज में जंक्शन की तैयारी की जा रही है। यह परियोजना जल-जंगल व जमीन उजाडऩे का काम करेगी एवं इसका पहले से ही जनता विरोध कर रही है।



