होलाष्टक के कारण इस पखवाड़े रूके रहेंगे मांगलिक कार्य

- 24 फरवरी से 10 मार्च तक रहेगी मांगलिक कार्यों पर रोक
सिरोही. होलाष्टक व शीतला सप्तमी को देखते हुए इस पखवाड़े मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। इस दौरान शुभ कार्य रूके रहेंगे। इसमें देव प्रतिष्ठा, वैवाहिक आयोजन, गृह प्रवेश आदि शामिल है। होली से आठ दिन पूर्व होलाष्टक एवं होली के बाद सात दिन तक शीतला माताजी के अगतों को देखते हुए कुल पंद्रद दिनों तक शुभ कार्य रूके रहेंगे।
ज्योतिष एवं वास्तुविद् आचार्य प्रदीप दवे ने बताया कि फाल्गुन शुक्ला अष्टमी (24 फरवरी) से पूर्णिमा (3 मार्च) तक होलाष्टक रहेगा। इसके बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (4 मार्च) से शीतला सप्तमी (10 मार्च) तक अगता रहेगा। इस पंदह दिन की अवधि में गृह प्रवेश, विवाह मुहूत्र्त, मुंडन संस्कार, देव प्रतिष्ठा आदि मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्योतिष, लौकिक एवं स्थानीय मान्यतानुसार इस अवधि में मानसिक तनाव दूर करने, हास-परिहास, फाग गायन, सामाजिक मेलजोल बढ़ाने तथा चेचक से बचाव को लेकर शुभ कार्यों पर रोक रहती है। वैसे इन दिनों में आकाशीय ग्रह शिथिल रहते हैं, जिससे उनका प्रभाव नकारात्मक रहता है। इसी कारण मानव शरीर की प्रकृति शिथिल हो जाती है तथा दिन में नींद, सुस्ती व आलस्य का प्रभाव बढ़ जाता है तथा रात्रि की नींद भी कम हो जाती है।
इसलिए रूकते हैं सब महत्वपूर्ण कार्य
आचार्य प्रदीप दवे ने बताया कि होली दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहते है। इस अवधि में ग्रह शिथिल रहने से मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। वहीं, स्थानीय बोलचाल की भाषा में रोक को अगता कहा जाता है। होली दहन के बाद सप्तमी तक के शीतलामाता के दिन माने गए हैं। चेचक से बचाव के लिए ओरी व शीतला माता को प्रसन्न किया जाता है। इसके लिए सभी महत्वपूर्ण कार्य रोक कर माता की पूजा-अर्चना करने की मान्यता रही है। माता को बासोड़ा का भोग लगाकर सेवन करने की परम्परा है।



