
- चार पंचायतों का एकमत निर्णय, खनन परियोजना का विरोध
- खनन स्वीकृति निरस्त नहीं होने पर तेज करेंगे आंदोलन
सिरोही. पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित लाइम स्टोन खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। चार पंचायतों के लोग एकजुट हुए तथा इस स्वीकृति को निरस्त किए जाने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना रहा कि आदिवासी क्षेत्र में जल-जीवन को खतरे में डालने वाली यह परियोजना जनता के साथ धोखा है। वाटेरा ग्राम पंचायत क्षेत्र के थंब बावसी मंदिर परिसर में ग्रामीण दो दिनों से आंदोलनरत है। इसमें वाटेरा, भीमाना, भारजा व रोहिड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने नारेबाजी की। साथ ही इस खनन परियोजना को स्वीकार नहीं करने की हूंकार भरी।
भीमाना में करेंगे धरना-प्रदर्शन
ग्रामीणों ने बताया कि रविवार को भीमाना गांव में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस सम्बंध में बुधवार रात करीब बैठक आयोजित कर आगामी रूपरेखा पर चर्चा की गई। उधर, ग्राम सभाओं में भी खनन योजना का विरोध करते हुए प्रस्ताव लिए गए हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से चेताया कि इस परियोजना को निरस्त नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
बिगड़ेगा अरावली का प्राकृतिक स्वरूप
ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र अरावली पर्वतमाला का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा खनन से इसका प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ जाएगा। खनन से पर्यावरणीय असंतुलन, भूजल स्तर में गिरावट, खेती योग्य जमीन का बंजर होना व वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं सामने आएगी। धूल व प्रदूषण से सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।
राजनीति संरक्षण के कारण अंदरखाने प्रक्रिया
बताया जा रहा है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण अंदरखाने ही सारी प्रक्रिया निपटाई जा रही है। ऐसे में जनसुनवाई भी बंद कमरे में करने की योजना थी, लेकिन ग्रामीणों को ऐनवक्त पर भनक लग गई, जिससे विरोध शुरू हो गया। जयपुर की कमलेश मेटाकास्ट कंपनी को खनन स्वीकृति दी जा रही है। इसके लिए आदिवासी क्षेत्र के वाटेरा, भीमाना, भारजा, रोहिड़ा, तरूंगी, डोरीफली आदि गांवों में 800 हैक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन के लिए स्वीकृति दी गई है।



