
- अधिकारियों की नजर में नहीं आ पाया मार्बल का अवैध खनन
- सवालों के घेरे में विभाग के स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली
सिरोही. सेलवाड़ा की मार्बल खदानों में अवैध खनन की पुष्टि के बाद स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। पट्टाधारकों की ओर से किए गए अवैध खनन मामले में जिम्मेदारों की बेपरवाही भी सीधे तौर पर सामने आ रही है। इसलिए कि केवल दो खदानों में ही लगभग 34000 मीट्रिक टन अवैध खनन की पुष्टि हुई है। बड़ी मात्रा में मार्बल का अवैध खनन किए जाने के बावजूद स्थानीय अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आया यह भी बड़ा सवाल ही है। हालांकि जांच टीम की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने दो पट्टाधारकों पर 75 करोड़ रुपए का जुर्माना आरोपित किया है, लेकिन जिम्मेदारों की जिम्मेदारी अभी तक तय नहीं की है।
शिकायत की जांच में उजागर हुआ मामला
उल्लेखनीय है कि सेलवाड़ा की खदानों में अवैध खनन का मामला भी विभाग ने नहीं पकड़ा है। इस सम्बंध में किसी परिवादी ने शिकायत भेजी थी। जिला कलक्टर व विभाग को भेजे गए परिवाद में तीन पटटाधारकों पर अवैध खनन एवं सरकारी भूमि में अपशिष्ट डाले जाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जांच हुई तो मामला उजागर हुआ।
इसलिए मॉनिटरिंग पर उठ रहे सवाल
माना जा रहा है कि सेलवाड़ा की खदानों में अवैध खनन की शिकायत नहीं होती तो यह बदस्तूर चलता रहता। जांच में भी जब दो खदानों में ही करीब 34000 मीट्रिक टन अवैध खनन का मामला सामने आया है तो सोच सकते है कि यह कितने दिनों से चल रहा था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर खनन विभाग की मॉनिटरिंग पर सवाल उठने भी लाजिमी है।
जांच टीम ने करवाया ड्रोन सर्वें
सेलवाड़ा क्षेत्र में चल रही मार्बल की खदानों में अवैध ब्लास्टिंग व निर्धारित से बाहर क्षेत्र में खनन किए जाने की शिकायत की गई थी। इसमें खनन पट्टाधारक ओम माइंस एंड मिनरल्स, योगेश गुप्ता व सीमा अग्रवाल के खिलाफ नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। मामले में जोधपुर अधीक्षण अभियंता ने जांच कमेटी गठित की। टीम ने ड्रोन सर्वे के जरिए जांच कर रिपोर्ट सौंप दी। इसमें दो खदानों में करीब 34000 मीट्रिक टन अवैध खनन की पुष्टि की गई है।



