- जिला कलक्टर को पत्र भेज कर मांगी तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट
- आमथला में बेशकीमती भूमि खुर्द-बुर्द किए जाने का मामला
सिरोही. आबूरोड के आमथला (aamthala) में वन विभाग (forest) की बेशकीमती भूमि को खुर्द-बुर्द किए जाने का मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया है। भू माफिया इस भूमि को डकारे जाने की तैयारी कर रहा है। इस बीच ही लोकायुक्त ने जिला कलक्टर से जांच रिपोर्ट तलब की है।
लोकायुक्त सचिवालय से जिला कलक्टर को भेजे पत्र में विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट चाही है। इसमें पटवार हल्का आमथला के खसरा संख्या-111 समेत अन्य उल्लेखित खसरों में कृषि भूमि का सीमाज्ञान करवा कर रिपोर्ट मांगी है। वहीं, इस खसरा नम्बर में वन भूमि पर नौ बीघा भूमि पर कोई अतिक्रमण है तो उस सम्बंध में की गई विधिक कार्यवाही की रिपोर्ट एवं अतिक्रमण रोकने के जिम्मेदार लोकसेवक पर की गई कार्यवाही रिपोर्ट भी मांगी गई है।
इस तरह हुआ था भूमि आवंटन
बताया जा रहा है कि वर्ष-1966 में सोमाराम पुत्र कालाराम को खसरा संख्या-111 में 22 बीघा भूमि आवंटित हुई थी। नियमानुसार उसने कब्जा भी प्राप्त कर लिया था, लेकिन इसके बाद हुए सेटलमेंट अभियान के दौरान वर्ष-1972-73 में यह आवंटित भूमि सहवन से वन विभाग के नाम चढ़ गई। आवंटित परिवार ने वर्ष-2013 में माउंट आबू एसडीएम के समक्ष अपने हक में नामांतरण खोलने का दावा प्रस्तुत किया। निर्णय में आवंटी के पक्ष में नामांतरण खोलने के आदेश पारित हुए।
जरीब के नाप-जोख में हड़प ली भूमि
असली खेल इस आदेश के बाद शुरू हुआ। उपखंड अधिकारी न्यायालय से पारित हुए आदेश के बाद आवंटी के नाम से 22 बीघा नामांतरण खोल दिया गया। इस मामले में आबूरोड तहसीलदार इस तरह का एक आवेदन भी दे चुके थे कि वर्ष-1966 में आवंटित 22 बीघा भूमि का नाप नई जरीब के अनुसार 13.15 बीघा ही बनता है। ऐसे में आवंटी केवल 13.15 बीघा भूमि ही अपने नाम चढ़वाने का अधिकारी है। लेकिन, इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
नामांतरण खुलते ही आवंटी ने विक्रय कर दिया
माना जा रहा है कि भू-माफिया ने बेशकीमती भूमि हड़पने का पूरा जाल बना रखा था। बताते हैं कि 22 बीघा भूमि का नामांतरण खोलने के बाद आवंटी ने इसे विक्रय कर दिया। मौके पर भौतिक रूप से भूमि नहीं होने से खरीदारों ने आसपास के वन भूमि को भी कब्जे कर लिया तथा आवंटी की वास्तविक 13.15 व वन विभाग की नौ बीघा भूमि को मिलाकर मौके पर 22 बीघा भूमि का नाप पूरा कर लिया।



