
- रामझरोखा की भूमि डकारने वालों को लाभ पहुंचाने का आरोप
- पूर्व विधायक की खुली चुनौती, कहा पूरे कुएं में भांग घुली है
सिरोही. पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने रामझरोखा मंदिर की भूमि पर बनाए पट्टों के मामले में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व उनके पुत्र को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने बाप-बेटा पट्टा चोर का खुला आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यमंत्री झूठ की फैक्ट्री है। यदि वे सच्चे है तो नार्को टेस्ट की सहमति दें तथा एक तरफ उनका व उनके बेटे का व दूसरी तरफ मेरा नार्को टेस्ट करवाएं सच क्या है सामने आ जाएगा। पूर्व विधायक ने यहां रविवार को मीडिया से रूबरू होकर मुख्यमंत्री को भेजे पत्र साझा किए। साथ ही भूमि के बेचान व लीज मामलों में वृहद स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर बात रखी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर न्यास पंजीकृत है और पूर्व का पट्टा बना हुआ है तो इन दस्तावेज को छोडक़र केवल नगर परिषद की पत्रावली को ही आधार क्यों बनाया गया। आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने राज्यमंत्री के दबाव में रामझरोखा मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से बनाए आठ पट्टों के मामले में पटटाधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जांच में भी तथ्य छोड़ दिए। नगर परिषद से उपलब्ध पत्रावली तक जांच सीमिति रखकर मंदिर के अधिकार को नकारने का काम किया है। उनका कहना रहा कि पूरे कुएं में ही भांग घुली हुई है।
इनके हित में क्यों रखी जांच की दिशा
पूर्व विधायक ने बताया कि इस सम्बंध में वे मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख चुके है। उनका मूल प्रश्न यह था कि मंदिर की भूमि पर पट्टे जारी ही कैसे हुए। पट्टे जारी करने में जानबुझकर गलत रिकार्ड, तथ्य छुपाने, अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्यवाही करने एवं आपसी मिलीभगत में अधिकारियों व लाभार्थियों की भूमिका जांचना था। एक तरफ जांच रिपोर्ट आठ पट्टों को गलत मानती है, वहीं दूसरी ओर यह जांच नहीं होती कि गलत पट्टे जारी करने के पीछे कौन जिम्मेदार है। सवाल यह है कि जांच की दिशा आठ पट्टाधारकों के हित में क्यों रखी गई।
सही है तो सार्वजनिक करों, अन्यथा कार्रवाई हों
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि का अवैध रूप से निजी स्कूल के पक्ष में हस्तांतरण हुआ है। यह केवल जमीन का मामला नहीं बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल है। मंदिर की सम्पति के साथ नियमों की अनदेखी होने, जांच से बाहर रखने के भी सवाल उठाए। साथ ही कहा कि सब कुछ यदि नियमों से हुआ है तो दस्तावेज सार्वजनिक कर जांच कराई जाएं और नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएं। मंदिर की भूमि किसी की निजी सम्पति नहीं है।
मौका टीम से इतर तहसीलदार का निष्कर्ष
उन्होंने सार्वजनिक उपयोग की लालवेरा श्मशान भूमि को खुर्द-बुर्द किए जाने पर भी सवाल उठाए। कहा कि जांच की मूल रिपोर्ट व तहसीलदार की रिपोर्ट में अंतर है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सघन आबादी के कारण पैमाइश सही नहीं हुई, सैटलमेंट से पैमाइश हों। राजस्व विभाग ने टीम मौके पर भेजी तब भूमि का वास्तविक स्वामित्व वैष्णव श्मशान कमेटी लालवेरा का पाया गया। जांच रिपोर्ट पट्टा धारक के हित में नहीं थी तो तहसीलदार ने कलक्टर को अलग राय भेज दी कि सघन आबादी के कारण पैमाइश सही हुई है और सैटलमेंट से वापस पैमाइश कराई जाएं। सवाल उठाया कि जब मौका टीम ने ऐसी कोई बात अपनी रिपोर्ट में नहीं लिखी तो तहसीलदार की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष कहां से आया।
भ्रष्टाचार के आरोपी क्या ही भला करेंगे
पूर्व विधायक ने नगर पालिकाओं में अधिकारी लगाए जाने के मामले में भी उंगली उठाई। आरोप है कि जिले की पालिकाओं में अधिकारी औश्र खासकर ईओ या आयुक्त जैसे पदों पर चुन-चुनकर अधिकारी लाए जा रहे हैं। उनका कहना रहा कि जिन पर पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हो वे अधिकारी पालिकाओं में बैठाए जा रहे हैं, जो जनता का क्या ही भला करेंगे। शहर में गुलाबनगर की भूमि पर गलत एवं फर्जी तरीके से पट्टे जारी करने के भी आरोप लगाए।



