
- पलटवार करने में अक्षम दिख रहे प्रवक्ता व पदाधिकारी
- न अपना पक्ष रखा और न विपक्षी के आरोपों का जवाब दे रहे
सिरोही. प्रवक्ताओं की पूरी फौज होने के बावजूद भाजपा जिला संगठन बयानों के मामले में कमजोर नजर आ रहा है। यहां तक कि संगठन व सत्ता के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से आ रहे बयानों की काट देने में भी ये अक्षम नजर आते हैं। हाल ही में रामझरोखा मंदिर की भूमि पर पट्टे बनाने के मामले में कांग्रेस ने राज्य सरकार व प्रशासन का घेराव किया, लेकिन इस पूरे प्रकरण में भाजपा कहीं नजर नहीं आई। न तो अपना पक्ष रखा और न कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। फिर चाहे संगठन जिलाध्यक्ष हो या तीन-तीन महामंत्री अथवा प्रवक्ताओं की फौज, न तो कोई बोल रहा है और न प्रतिक्रिया आ रही। जिलाध्यक्ष, एक महामंत्री व अधिकतर प्रवक्ता सिरोही शहर से ही आते हैं। इसके बावजूद विपक्षी दलों को जवाब देने के लिए सामने नहीं आना तो यही दर्शाता है कि वे सत्ता की मलाई खाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।
फिर भी स्पष्ट नहीं किया अपना रूख
रामझरोखा मंदिर की भूमि पर पट्टे बने कम से कम चार माह तो ही गए, लेकिन भाजपा की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया। इसी माह की शुरुआत में कांग्रेस ने इस मसले पर प्रदर्शन की घोषणा की, तब भी कोई अधिकृत बयान नहीं आया। मंदिर की भूमि पर पट्टे बनाने में भाजपा की भूमिका को लेकर खुले आरोप लगाए गए, लेकिन भाजपा ने अपना रूख स्पष्ट ही नहीं किया।
जनता के सामने कहीं कमजोर न पड़ जाए
पंचायतराज व स्वायत्तशासी संस्थाओं के चुनावों की घोषणा होना भले ही बाकी हो पर चुनाव ऐन सिर पर आते दिख रहे हैं। वहीं, राज्य में भाजपा सरकार अपने दो वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी में है। इसके बावजूद जिले में इस तरह के मामलों में जनता के समक्ष अपना पक्ष नहीं रखने से भाजपा पूरी तरह कमजोर दिख रही है। चुनाव में वे किन मुद्दों को लेकर जनता के पास जाएंगे यह कहना मुश्किल है। अंदेशा है कि इन कारणों से जनता के सामने भाजपा कहीं कमजोर न पड़ जाए।
अनभिज्ञ थे या जानबुझकर अनभिज्ञता जताई
यहां तक कि हाल ही में हुए शिविरों में भाजपा पदाधिकारी पूरे समय नगर परिषद में ही डेरा डाले हुए थे, लेकिन इस मामले में वे अनभिज्ञ कैसे रहे यह समझ से परे है। मंदिर की भूमि पर पट्टे बने हैं तो इनकी नजर में भी होना चाहिए था। अभी तक की चुप्पी से तो यही लगता है कि या तो भाजपा पदाधिकारी इससे अनभिज्ञ थे या जानबुझाकर चुप्पी साधे रहे। चाहे जो भी हो, लेकिन विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए किरकिरी तो हो ही गई।



