आबकारी को मिल रही मंथली, कायदों को ठेंगा दिखा रहे ठेकेदार
- जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों में जमकर छलके जाम
- गोदामों के नाम पर चला रहे ठेकों में ड्राय डे पर भी बिक्री
सिरोही. आम दिनों में तो शराब की अवैध बिक्री होती ही है। ड्राय डे पर भी जमकर जाम छलकते रहे। गांधी जयंती पर ड्राय डे घोषित होने के बावजूद जिले में शराब की जमकर अवैध बिक्री हुई। दूर-दराज के गांव तो ठीक है जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों में भी ड्राय डे की जमकर धज्जियां उड़ी। आबकारी महकमा इस मामले में पूरी तरह मूकदर्शक नजर आया। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों से मंथली लेने के कारण आबकारी महकमे के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, ठेकेदार नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
जानकारी पहुंची पर कार्रवाई में गंभीर नहीं
उधर, आबकारी महकमे के अधिकारियों की बेपरवाही का आलम तो यह रहा कि वे फोन तक रिसीव नहीं कर रहे। शराब की अवैध बिक्री या ऐसी ही जानकारी साझा करने के लिए न तो कोई विकल्प है और न अधिकारी गंभीरता दिखा रहे हैं। सिरोही मुख्यालय पर कार्यरत आबकारी निरीक्षक विक्रमसिंह ने फोन रिसीव ही नहीं किया। ड्राय डे पर शराब बिकने की जानकारी व्हाट्सएप मैसेज से भेजी पर उसका भी प्रत्युत्तर नहीं मिला। ऐसे में कार्रवाई किस तरह हो पाएगी कहना मुश्किल है।
पिछले दरवाजों से पार निकाली शराब
जिला मुख्यालय के शराब ठेकों पर पिछले दरवाजे से जमकर माल बेचा गया। दुकानों में खिड़कियों व पिछली साइड में बने दरवाजों से शराब बाहर निकाली गई। वहीं, कुछ जगहों पर पहले से ही नजदीकी ढाबों पर माल रख दिया गया, जहां से बिक्री की गई। ड्राय डे पर दुकानों के गेट पर सील लगाई गई, लेकिन पिछले दरवाजे, खिड़कियां या नजदीकी ढाबों पर कोई निगरानी नहीं देखी गई।
बंद दरवाजे और खुली कुंडी पर लटकता खुला ताला
नियमों को ताक पर रखा गया है तो फिर क्या फर्क पड़ता है कि बिक्री गोदाम हो या शराब की दुकान से। शहर से सटे मांडवा गांव में गोदाम के नाम पर शराब की दुकान संचालित की जा रही है। कागजों में भले ही इसे गोदाम का नाम दिया गया हो, लेकिन इसे दुकान की तरह की चलाया जा रहा है। यहां तक कि इस पर नाम भी शराब की दुकान ही लिखा हुआ है। ड्राय डे पर भी यहां शराब बिकती रही। दरवाजा बंद था, लेकिन खुली कुंडी पर खुला ताला लटकता रहा। गोदाम की आड़ में चल रही इस शराब की दुकान को देखा जाए तो पूरे जिले की स्थिति सामने आ जाती है।



