मासिक बंधी के आरोप और निगरानी तंत्र पर उठ रहे सवाल

- प्रतिबंधित दिनों में भी जमकर हो रही शराब बिक्री
- सूचना पहुंची पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे जिम्मेदार
सिरोही. जिले में शराब बिक्री को लेकर नियम-कायदों के पालन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आम दिन हो या ड्राय डे, शराब की दुकानों की निगरानी और नियमों की पालना को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। गांधी जयंती पर ड्राय डे के दिन भी जिले के अलग-अलग इलाकों में शराब उपलब्ध होने और जाम छलकने की शिकायतें आती रही। ऐसे में आबकारी विभाग की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। शराब की दुकानें व गोदामों में भी अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। वहीं, ढाबों में भी जाम छलक रहे हैं। प्रतिबंधित दिनों में शराब बिक्री की शिकायतें सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी का मामला है, लेकिन मासिक बंधी के कारण आबकारी महकमा मूकदर्शक बना हुआ है। अधिकारियों तक जानकारी पहुंचने के बाद भी न तो कार्रवाई हो रही है और न अवैध बिक्री पर रोक लग पा रही है।
फिर कैसे हो पाएगी कायदों की पालना
मांडवा में गोदाम से शराब की बिक्री व पिण्डवाड़ा में ढाबे पर शराब बेचने की सूचना के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आबकारी निरीक्षक विक्रमसिंह तक जानकारी पहुंची, लेकिन वे मूकदर्शक बने रहे। यहां तक कि जांच के नाम पर केवल औपचारिकता एवं कागजी निरीक्षण ही किए जा रहे हैं। जांच में न तो गंभीरता दिखाई जा रही है और कायदों की पालना हो रही है। ऐसे में अवैध बिक्री पर रोक और नियमों की पालना किस तरह होगी, कहना मुश्किल है।
आदेश केवल कागजों में चल रहे
ड्राय डे घोषित होने पर शराब की दुकानों को बंद रखने के निर्देश होते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कि यदि दुकानों के बंद रहने का प्रावधान है तो प्रतिबंधित दिन शराब ग्राहकों तक कैसे पहुंची। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के मुताबिक नजदीकी ढाबों पर भी शराब की उपलब्धता बनी रही। दुकानों के पिछले दरवाजे और खिड़कियों से शराब बिक्री होती रही सो अलग।
निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जिले के ढाबों और शराब की दुकानों के लिए स्वीकृत गोदामों में भी अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। इस तरह के मामले विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में ड्राय डे पर कमोबेश ऐसे ही हाल देखे गए। सिरोही जिला मुख्यालय पर जमकर जाम छलके। नजदीकी मांडवा गांव में बकायदा गोदाम से शराब बेची जाती रही। गांव में शराब ठेकेदार ने गोदाम के नाम से लोकेशन स्वीकृत करवा रखी है। इसे दुकान की तरह की चलाया जा रहा है। इस गोदाम के दरवाजे तक न तो सीज थी और न ताला। दिनभर आराम से शराब बिकती रही। कमोबेश यही हाल पिण्डवाड़ा मुख्यालय पर भी देख गया। यहां झांकर चौराहा स्थित ढाबे पर भी शराब बिकने की सूचना है।
आखिर क्यों मूकदर्शक बन रहे जिम्मेदार
ड्राय डे जैसे दिनों में आबकारी विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में शराब की दुकानों की स्थिति, आसपास की गतिविधियों और अवैध बिक्री की शिकायतों पर विशेष निगरानी भी अपेक्षित है। इसके बावजूद यदि किसी इलाके में प्रतिबंध के दौरान शराब उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आ रही है तो यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि निगरानी व्यवस्था प्रभावी क्यों नहीं है। और यह भी कि आबकारी महकमा आखिर मूकदर्शक क्यों बना हुआ है।



