
- जल संरक्षण कार्यों में किया नवाचार, तकनीक से बचा रहे जल
- वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत फील्ड विजिट
सिरोही. जल व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिले में कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसके तहत चारागाहों में फल व फूलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। साथ ही नए घास बीड़ भी तैयार हो रहे हैं। चारागाह भूमि पर कुछ ही वर्षों में जहां बड़े पेड़ लहलहा उठेंगे, वहीं, पशु चराई के लिए घास भी उगाई जाएगी। पिण्डवाड़ा क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर इस तरह के नवाचार किए जा रहे हैं।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत मीडियाकर्मियों ने फील्ड विजिट की। इस दौरान जल संरक्षण कार्यों, नवाचारों व आधुनिक तकनीकी से किए जा रहे इन कार्यों तथा वन एवं जल संरचनाओं अवलोकन किया। जिला कलक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर के निर्देशानुसार जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धीरजकुमार दवे का नेतृत्व रहा। मीडियाकर्मियों ने पिण्डवाड़ा क्षेत्र में चारागाह, एनिकट आदि देखे तथा वंदे गंगा जल संरक्षण को लेकर शपथ ली। इस दौरान विकास अधिकारी नवलाराम चौधरी, मनरेगा एक्सईएन भगवानसिंह राजपुरोहित, वॉटरशेड एईएन प्रवीण बजाज, जेईएन चेतनासिंह राव, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी फूलाराम सोलंकी, विनोद आसेरी, कुलदीपसिंह, भैराराम पटेल आदि मौजूद रहे।
मियावाकी पद्धति से करेंगे पौधरोपण
ग्राम पंचायत झाड़ोली में चारागाह विकास कार्य का अवलोकन किया गया। यहां चौकीदार कक्ष, ट्यूबवेल खुदाई कार्य, सोलर पम्प स्थापना की जानकारी ली गई। इस चारागाह में दो हजार पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही मियावाकी पद्धति से पौधरोपण करने की योजना बताई गई। इसके तहत पौधों की विकसित दर काफी ज्यादा है। फॉर्म पौंड निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया। इसमें वर्षा जल संग्रहण कर पौधों का पानी दिया जाएगा।
पौध विकसित होने के बाद उगेगी घास
चारागाह डवलप के तहत झाड़ोली में सिवेरा रोड पर पनपाए गए फल व फूलदार पौध का अवलोकन किया गया। चारागाहों में पौध विकास के लिए अभी तारबंदी की गई है। पौधे विकसित होने के बाद तारबंदी हटाकर नीचे घास उगाई जाएगी, ताकि पशुधन की चराई हो सके। यहीं नर्सरी डवलप करते हुए पौध पनपाई जाएगी, ताकि फल व फूलदार पौधों की अन्य जगहों पर बिक्री भी की जा सकती है।

चैकडेम से करंगे 45 लाख लीटर जल संग्रहण
कार्यक्रम के दौरान चैकडेम का अवलोकन किया गया। 22 लाख की लागत से बन रहे इस डेम से करीब 45 लाख लीटर जल संग्रहण होगा। इससे खेतों में सिंचाई के साथ ही आसपास के कुएं रिचार्ज होंगे। परलाई गोचर भूमि में 10 लाख की लागत से पौधरोपण किया जा रहा है। यहां हैंडपम्प से सिंचाई की जा रही है। यहां करीब 1200 पौधे जीवित व विकसित अवस्था में है।



