सिरोहीrajasthansirohiराजस्थान

नदी में व्यर्थ बहा दिया धांता बांध का चौदह फीट पानी

  • जल संरक्षण के दावों का कड़वा सच, अब शून्य पर गेज
  • मानसून से पहले मरम्मत हो जाती तो पानी बहाना न पड़ता

सिरोही. गत मानसून की बारिश के बाद लबालब हुआ धांता बांध चार पाण पानी देने के बाद भी चौदह फीट पर था, लेकिन अचानक ही इसका पानी नदी में बहा दिया गया। माना जा रहा है कि जितना पानी पाण में खर्च हुआ उतना ही अभी बांध में बचा हुआ था। अब धांता बांध का गेज शून्य पर है। बताया जा रहा है कि बांध की मोरी में छेद हो जाने से नुकसान का अंदेशा था। ऐसे में मरम्मत के लिए बांध में भरा पानी बाहर निकाला गया। चाहे जो हो, लेकिन यह तय है कि जल संरक्षण दावों के बावजूद 28 फीट भराव क्षमता वाले धांता बांध का करीब चौदह फीट पानी व्यर्थ बहा दिया गया। इसकी भरपाई कैसे होगी कहना मुश्किल है।

कहां खप जाता है मरम्मत का बजट
अधिकारी बताते हैं कि बांध को खाली किए बगैर मोरी व स्लुइस गेट की मरम्मत नहीं हो सकती थी। लेकिन, बड़ा सवाल यह कि जब हर बार मानसून से पहले मोरी व स्लुइस गेट की मरम्मत के नाम पर किए जाने वाले कार्य एवं उसमें बजट भी खर्च किया जाता है उसका क्या हुआ। गत मानसून से पहले बांध की मरम्मत पर ध्यान नहीं देने से इस मानसून में बांध शून्य पर खड़ा है।

सूखी नदी में समाहित हो गया पानी
बांध की नहर को कुछ आगे तोड़ कर अवरोध डाला गया है। वहां से इसे नदी की ओर डाईवर्ट किया गया है। बांध का पानी कामेरी बांध के लिए छोड़ा गया, लेकिन नदी में बजरी खनन से हुए गड्ढों के कारण पानी आगे तक पहुंचा ही नहीं। गांव से कुछ आगे जाकर ही यह नदी में समाहित हो गया। कामेरी तक पहुंचता तब यह उपयोग में भी आ सकता था।

हजारों की तादाद में मर गई मछलियां
बांध का पानी व्यर्थ बहा देने के बाद इसमें पनप रही मछलियों ने भी दम तोड़ दिया। बांध के पैंदे में मछलियों के अवशेष फैले पड़े हैं। पानी की बर्बादी के साथ ही मछलियों को अकारण ही मरना पड़ा। नहर से लेकर नदी तक पानी में मृत मछलियों का अम्बार लगा हुआ है। वहीं, बदबू के कारण बांध क्षेत्र में खड़े रहना तक मुहाल हो रहा है। हजारों की तादाद में मछलियां मरने की जिम्मेदारी आखिर किसके सिर रहेगी यह कह नहीं सकते।

सिरोही. धांता बांध की मोरी में छेद की हुई मरम्मत।

मरम्मत जरूरी थी…
मोरी के पास छेद हो जाने से बांध टूटने का खतरा था। पानी भरा होने से पहले कट्टे लगाकर एहतियातन प्रबंध किए थे। मरम्मत के लिए बांध खाली करना था, लेकिन किसानों को पाण की जरूरत नहीं थी। इसलिए पानी नदी में डाला गया।

  • शिवप्रकाश, एक्सईएन, जल संसाधन विभाग, सिरोही

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