अवैध चल रहे हॉस्टल में पांच बच्चों का यौन शोषण

- गुमनाम शिकायत के आधार पर हुई जांच में खुला मामला
- प्रलोभन देकर वार्डन कर रहा था बच्चों का यौन उत्पीडऩ
सिरोही. शहर में अवैध रूप से चल रहे हॉस्टल में पांच बच्चों के यौन उत्पीडऩ का मामला सामने आया है। आदर्शनगर रोड पर संचालित इस हॉस्टल का वार्डन प्रलोभन देकर बच्चों का यौन शोषण कर रहा था। मामले का खुलासा एक गोपनीय शिकायत के बाद हुआ है। इस सम्बंध में एक शिकायत मिली थी, जिस पर विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल कल्याण समिति ने एक टीम गठित कर जांच की। इसके बाद कुल पांच बच्चों के साथ इस तरह के अनुचित व्यवहार की बात सामने आई है। फिलवक्त हॉस्टल संचालक को हिरासत में लिया गया है। वहीं, बच्चों की मेडिकल जांच करवाई जा रही है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आयोजित बैठक में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुश्री रतन बाफना, सदस्य प्रतापसिंह नून व शशिकला मरडिय़ा, पुलिस उपनिरीक्षक प्रेमसिंह, कांस्टेबल श्रीमती कांता व प्रदीप शर्मा एवं प्राधिकरण से दिलीपसिंह व शाहनवाज ने शिरकत की। बैठक के बाद इन सभी को शामिल करते हुए टीम गठित की गई तथा हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया गया।
इस तरह खुला यौन शोषण का मामला
गत एक जुलाई को ई-मेल पर इस तरह की एक गोपनीय शिकायत मिली थी। इसमें बताया था कि आदर्शनगर रोड पर संचालित निजी छात्रावास में बालकों का यौन उत्पीडऩ किया जा रहा है। इस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाल कल्याण समिति एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद इस निजी हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया। पूछताछ में बच्चों के साथ यौन उत्पीडऩ का मामला सामने आया। वहीं, कई अनियमितताएं भी मिली।
कार्यालय में करता था यौन उत्पीडऩ
निरीक्षण के दौरान टीम ने बच्चों से पूछताछ कर मामले की पुष्टि की। छात्रों का कहना रहा कि महंगे गिफ्ट आदि देने एवं विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर वार्डन उनके साथ हॉस्टल कार्यालय में अनुचित व्यवहार व यौन उत्पीडऩ करता था। छात्रों से यह तथ्य सामने आया कि वार्डन ने कुल पांच बच्चों के साथ अनुचित कृत्य किया है। हॉस्टल से छात्रों को परिजनों से बात करवाते समय फोन में रिकॉर्डिंग ऑन रखी जाती थी, ताकि बच्चे परिजनों से इस अनुचित कृत्य की शिकायत न कर सके। हॉस्टल में उपलब्ध बालकों के आवेदन, सीसी टीवी कैमरे की डीवीआर आदि संरक्षण में लेकर पुलिस के सुपुर्द किए। वहीं, कार्यालय का कैमरा गत दो माह से खराब होने की जानकारी वार्डन ने निरीक्षक टीम को दी।
न पंजीयन, न रजिस्टर और न सुविधाएं
निरीक्षण में सामने आया कि हॉस्टल का कोई पंजीयन तक नहीं था। यहां तक कि साफ-सफाई व अन्य प्रबंध भी माकूल नहीं पाए गए। छात्रों के व्यक्तिगत विवरण के संबंध में भी कोई पत्रावली एवं रजिस्टर नहीं पाया गया। यहां कार्यरत बावर्ची व अन्य कार्मिकों की उपस्थिति का भी रजिस्टर नहीं पाया गया। लगभग 40 बच्चों का हॉस्टल महज तीन कमरों में चल रहा था। वहीं, सुविधाओं के अभाव में बच्चे स्नान भी खुले में कर रहे थे।



