
- सीमा पर खुले छोड़ दिए नाके, गुजरात से आ रही बजरी
- आदिवासी बहुल आबूरोड क्षेत्र में नाका तक नहीं लगाया
सिरोही. बजरी के अवैध खनन की रोकथाम के लिए गुजरात सीमा पर नाकाबंदी के बजाय खुली छूट दी जा रही है। खनिज विभाग की ओर से न तो गुजरात सीमा पर नाके लगाए गए हैं और न नाकाबंदी की गई है। ऐसे में गुजरात एवं आसपास के इलाकों से अवैध रूप से आने वाली बजरी सीधे राजस्थान पहुंच रही है। हालांकि उच्चस्तरीय आदेशों की पालना में जरूर नाकाबंदी कराई गई है, लेकिन जिन इलाकों में अवैध खनन का ज्यादा अंदेशा है वहां नाके खुले ही छोड़ दिए। गुजरात से सटे आबूरोड क्षेत्र में कमोबेश यही हाल है। विभागीय नाकाबंदी की ज्यादा जरूरत आबूरोड में थी, लेकिन महकमे ने नाका नहीं लगाकर मानों बजरी माफिया को खुली छूट दे दी है। उधर, खनिज अभियंता चंदनकुमार से सम्पर्क किया गया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इसलिए अवैध रूप से आ रही बजरी
आबूरोड ब्लॉक जिले का सबसे बड़ा क्षेत्र होने से यहां बजरी की खपत भी ज्यादा है। माउंट आबू में भी भारी मात्रा में बजरी की भारी मांग है। वहीं, आसपास के कई गांवों में बजरी की बड़ी खपत है। आबूरोड से सटे गुजरात के क्षेत्र से वृहद स्तर पर बजरी उठ रही है। इसके बाद भी आबूरोड तहसील क्षेत्र में एक भी नाका नहीं लगाया गया। ऐसे में अधिकतर बजरी अवैध रूप से पहुंच रही है।
रोकथाम के प्रयास नहीं हो रहे
सिरोही के आबूरोड क्षेत्र में एक भी बजरी लीज नहीं है। आदिवासी बहुल आबूरोड टीएसपी क्षेत्र होने से यहां पूर्व में भी बजरी की लीज नहीं रही है। ऐसे में यह क्षेत्र पूरी तरह गुजरात से आने वाली बजरी पर निर्भर है। लिहाजा वैध के साथ अवैध तरीके से भी बजरी आबूरोड पहुंच रही है। इसे रोकने का खनिज विभाग कोई प्रयास नहीं कर रहा।
फिर भी आबूरोड को खुला छोड़ दिया
आबूरोड व रेवदर क्षेत्र गुजरात सीमा से सटा हुआ है। खनिज विभाग ने भी गुजरात सीमा पर नाकाबंदी की औपचारिकता के लिए रेवदर में नाका खोल दिया। आबूरोड में विभाग ने नाका स्थापित ही नहीं किया। वैसे रेवदर क्षेत्र में दो-तीन जगह बजरी खनन की लीज है तथा लीज धारक अपने क्षेत्र में अन्य जगहों से अवैध रूप से आने वाली बजरी रोकने को प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, आबूरोड में न तो कोई लीजधारक है और न कोई कार्मिक लगा है।



