
- पल्स पोलियो अभियान में सामान्य परमानेंट मार्कर की खरीद
- तय मानकों के अनुसार खरीद करने थे इंडीलेबल मार्कर
सिरोही. स्वास्थ्य महकमे ने मार्कर की स्याही से सेहत का खेला कर दिया। पल्स पोलियो अभियान में इंडीलेबल मार्कर के बजाय सामान्य मार्कर के उपयोग का मामला प्रकाश में आया है। सामान्य मार्कर की स्याही बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसके बावजूद सामान्य मार्कर का ही उपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय अभियान के तहत इस बार राज्य से इंडीलेबल मार्कर नहीं आ पाए। ऐन वक्त पर स्थानीय स्तर पर ही खरीद के निर्देश दिए, जिस पर अधिकारियों ने स्थानीय बाजार से परमानेंट मार्कर की ताबड़तोड़ खरीद कर ली। पल्स पोलियो की खुराक गटकने के बाद अंगुली पर मार्कर से निशान लगाते हैं लेकिन मानकों के अनुरूप नहीं होने से सामान्य मार्कर की स्याही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ जाती है।
स्वास्थ्य कारणों से बनी गाइड लाइन
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गाइड लाइन निर्धारित कर रखी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन व राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम की गाइड लाइन के अनुसार इंडीलेबल मार्कर का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके तहत बच्चों की अंगुली पर निशान के लिए जो स्याही लगाई जाती है वह त्वचा के लिए नुकसानदेह नहीं होनी चाहिए। साथ ही कोई बच्चा स्याही के ताजा निशान को मुंह में डाल कर चाट ले तो भी उसे नुकसान न पहुंचे।
बच्चों के लिए नुकसानदायक मार्कर
वैसे स्टेशनरी की दुकान में मिलने वाले सामान्य मार्कर में यह स्थिति नहीं होती। बच्चा इस स्याही को चाट ले तो उसे नुकसान हो सकता है। ताजा स्याही मुंह में डालने या बार-बार चाटने पर खतरे का अंदेशा बना रहता है। बताया जा रहा है कि इस तरह के कुछ मामलों में मुंह में जलन, जी मिचलाने, उल्टी, पेट की परेशानी या त्वचा पर जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
फिर भी खरीद लिए परमानेंट मार्कर
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य स्टेशनरी या परमानेंट मार्कर त्वचा पर उपयोग के लिए डिजाइन नहीं किए जाते। इनमें आने वाले केमिकल दुष्प्रभाव छोड़ सकते हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमे ने परमानेंट मार्कर की खरीद कर राष्ट्रीय अभियान में इसका उपयोग कर दिया। सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सामान्य परमानेंट मार्कर का उपयोग क्यों किया गया।
सवाल तो यह भी…
- बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े राष्ट्रीय अभियान में निर्धारित गाइड लाइन की पालना नहीं हुई है तो जिम्मेदारी किसकी
- महकमे के जिम्मेदारों से इस सम्बंध में जवाब पूछा जाएगा या सब कुछ पूर्ववत स्थिति में ही चलता रहेगा
- स्थानीय स्तर पर खरीद करनी थी तब भी परमानेंट के बजाय इंडीलेबल मार्कर की खरीद क्यों नहीं की
- इंडीलेबल व परमानेंट मार्कर के मूल्य में अंतर व खरीद की राशि में कोई अंतर है या नहीं
इसलिए खरीद की…
इंडीलेबल मार्कर राज्य स्तर से नहीं आए थे। वहां से निर्देश मिलने के बाद ही स्थानीय स्तर से खरीद की गई है।
- डॉ.दिनेश खराड़ी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिरोही



