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शराब के नशे में ड्यूटी पर जिला अस्पताल के चिकित्साकर्मी

  • ड्यूटी आवर में जाते हैं ठेके पर, शराब पीकर वापस अस्पताल
  • जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं

सिरोही. जिला अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए शराब मंगवाने वाले आरोपों के बीच एक और नया खुलासा हुआ है। अस्पताल के कार्मिक ड्यूटी आवर में ही शराब सेवन कर रहे हैं। चौकना लाजिमी पर हकीकत यही है। अस्पताल समय में ही कार्मिक न केवल शराब की दुकान तक पहुंच रहा है वरन् शराब पीने के बाद फुटपाथ की थड़ी पर नाश्ता कर वापस ड्यूटी पर भी पहुंच जाता है। अस्पताल में ड्यूटी के दौरान उसके पास नर्सिंग स्टूडेंट तक बैठीं नजर आ रही है। शराब के नशे में कार्मिक किस तरह से ड्यूटी करते होंगे यह आसानी से सोच सकते है। जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं दिनोंदिन बिगड़ रही है, लेकिन इनमें सुधार लाने के कोई प्रयास नहीं हो रहे।

अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे
उधर, यौन उत्पीडऩ जैसे मामलों में भी मेडिकल जांच के लिए शराब मांगी जा रही है। बालिकाओं को मेडिकल के लिए घंटों तक इंतजार करवाया जा रहा है और यह सब बाल कल्याण समिति सदस्यों के संज्ञान में भी है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही। अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे है।

अवलोकन किया पर बदहाली जस की तस
कुछ समय पहले जिला कलक्टर भी अस्पताल का अवलोकन कर चुके हैं। इससे पहले जिला प्रभारी मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री भी दौरा कर चुके हैं, लेकिन बदहाल व्यवस्थाएं जस की तस नजर आ रही है। मेडिकल करवाने आए पुलिसकर्मियों से खुले रूप से शराब मंगवाना और ड्यूटी आवर में शराब पीने जाना जैसे मामले सामने आने पर भी न तो जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हो रही और न सुधार हो पा रहा है।

सिरोही में ड्यूटी आवर में शराब के ठेके पर पहुंचा चिकित्साकर्मी व वापस आकर ड्यूटी देते हुए।

हर बार कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
हाल ही में शहर के निजी हॉस्टल में बच्चों के यौन शोषण मामले में भी जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। पांच बच्चों के मेडिकल जांच करवाते समय शराब मांगे जाने के आरोप लगे हैं। वहीं, इस घटना से पंद्रह दिन पहले भी एक बच्चे को अस्पताल लाना मालूम हुआ है। उसमें चिकित्सक ने प्रथमदृष्टया यौन शोषण का अंदेशा जताया भी था, लेकिन बच्चे को उपचार कर घर भेज दिया। अस्पताल ने इस गंभीर मामले की पुलिस-प्रशासन को सूचना तक देना उचित नहीं समझा। राजकीय चिकित्सक की इस बेपरवाही पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यौन शोषण का यह मामला इस उपचार के पंद्रह दिन बाद एक गोपनीय शिकायत के आधार पर खुल पाया।

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