
- सत्ता हासिल करने की कवायद में हो सकती है खरीद-फरोख्त
- शिवगंज व आबूरोड में गुल खिला सकता है किनारे का बहुमत
सिरोही. निकायों में चुनाव के दौरान रिसॉर्ट पॉलिटिक्स तो देख ही रहे हैं, लेकिन होर्स ट्रेंडिंग भी देखने को मिल जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। चौंकना लाजिमी पर हकीकत यही है। यदि ऐसा होता भी है तो जिले की छह में से दो निकायों में इस तरह की संभावना हो सकता है। हालांकि यह सही नहीं है, लेकिन राजनीतिक दल सत्ता हासिल करने की गरज से ऐसा करते है। शिवगंज में जहां भाजपा एकदम बहुमत के आंकड़े पर ही है। वहीं, आबूरोड में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। यहां बहुमत के आंकड़े के लिए भाजपा को एक सीट की जरूरत है। वहीं, कांग्रेस को यहां जीतकर आए चार निर्दलीयों के बाद भी एक सीट की जरूरत रहेगी।
यह करेंगे तभी समीकरण बैठेगा
शिवगंज में भाजपा किनारे के बहुमत पर है। यहां कांग्रेस को सत्ता हासिल करने के लिए जीतकर आए कुल तीन निर्दलीयों को साथ मिलाना जरूरी है। इसके बाद भी इनको एक प्रत्याशी की जरूरत रहेगी। भाजपा में तोड़-फोड़ के बाद ही यह संभव हो सकता है। इसी तरह आबूरोड में भाजपा को बहुमत के लिए एक सीट चाहिए। वहीं, कांग्रेस को यहां जीतकर आए कुल चार निर्दलीयों को अपने साथ मिलाने के बाद भी एक सीट आवश्यक रहेगी। इसके लिए भाजपा से ही एक प्रत्याशी मिलाना होगा।
जोड़ तोड़ की गणित लगानी ही पड़ेगी
निकायों में स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही अब सभापति चुनाव पर नजरें ठहर रही है। निकायों में अध्यक्ष के पद पर आसीन होने वाले प्रत्याशियों को लेकर समीकरण बैठाए जा रहे हैं। सिरोही व पिण्डवाड़ा में जहां कांग्रेस के पास बहुमत है, वहीं शिवगंज व माउंट आबू में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय है। आबूरोड व मंडार में अध्यक्ष पद के लिए बाजी जरूर निर्दलीयों के हाथ में रहेगी। अध्यक्ष पद के लिए जोड़ तोड़ की गणित लगानी ही पड़ेगी।



