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रेवदर में लाखों का जुआ और नशा कारोबार, कांस्टेबल की बर्खास्तगी से मामले का पटाक्षेप

  • बड़े मगरमच्छ बचाने के लिए सबसे छोटी कड़ी पर टारगेट
  • जुआ-सट्टा व नशे की फैक्ट्री मामले में किसी की जिम्मेदारी तक तय नहीं

सिरोही. रेवदर में कृषि कुएं पर जुआ-सट्टे का मामला पकड़ में आने के बाद एक कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया गया। आरोप है कि जुआ-सट्टे की टीम को यहां बैठाने से लेकर सेटिंग करने तक का दारोमदार इसी पर था। मान सकते हैं कि यह निचली कड़ी रही हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण में अकेला कांस्टेबल पूरा खेल रच सकता हो ऐसा हो नहीं सकता। मामला रेवदर में सत्ताधारी दल से जुड़े पूर्व विधायक के कृषि कुएं पर पकड़े गए जुआ प्रकरण का है। कांस्टेबल को बर्खास्त कर पुलिस ने यह संदेश जरूर दिया है कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन यह विचारणीय है कि पूर्व विधायक के कुएं पर जुए-सट्टे का बड़ा कारोबार क्या एक कांस्टेबल की शह पर चल सकता है। बड़े मगरमच्छों की मिलीभगत के बगैर शायद ही हो पाए। माना जा रहा है कि इसमें खाकी से लेकर खादी तक के हाथ शामिल है, लेकिन पुलिस ने निचली कड़ी को टारगेट कर मामले की इतिश्री कर दी। रेवदर क्षेत्र में नशे की फैक्ट्री पकड़े जाने के मामले में तो किसी की जिम्मेदारी तक तय नहीं की गई।

जुआ-सट्टा व नशे की फैक्ट्री भी मिली
ज्ञातव्य है कि रेवदर क्षेत्र के दांतराई में भी नशे की फैक्ट्री जब्त की जा चुकी है। एनसीबी की टीम ने यहां तीन दिन रहकर पूरी जांच की। खुलासा किया कि लाखों रुपए कीमत का नशा यहां बनाकर पार किया गया है। जुआ-सट्टा व नशे की फैक्ट्री जैसे दो बड़े मामले रेवदर थाना क्षेत्र में सामने आए, लेकिन जुआ प्रकरण में एक कांस्टेबल के अलावा किसी पर आंच नहीं आई। इन दो मामलों में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तक तय नहीं की गई। लाखों-करोड़ों के अवैध कारोबार की यदि किसी को भनक तक नहीं लगी तो इसका जिम्मेदार कौन रहा इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब देखना यह रहेगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या दूसरे चेहरे भी बेनकाब होंगे।

खाकी व खादी के गठजोड़ की चर्चा
रेवदर क्षेत्र में पूर्व विधायक के कुएं पर पकड़े गए जुए के मामले में चर्चा है कि पर्दे के पीछे कुछ प्रभावशाली चेहरे भी सक्रिय हैं, जो इस पूरे खेल में जुड़े हुए हैं। सबसे अहम दो नामों को लेकर ज्यादा चर्चा हो रही है। खाकी से जुड़ा एक चेहरा और सत्ता पक्ष से नजदीकी रखने वाला स्थानीय नेता भी इसमें शामिल बताया जा रहा है। अब सियासत से जुड़े हुए प्रभावशाली लोग है तो उन तक आंच कैसे आ सकती है।

खंगालनी चाहिए आरोपियों की कॉल डिटेल
मामला पकड़ में आया तभी से पुलिस अधिकारी इस बारे में ज्यादा कुछ बताने से असमर्थ दिख रहे थे। घटनास्थल के बारे में पुलिस अधिकारी प्रारंभ से ही बताते रहे कि जांच के बाद ही कुछ कह सकते है। उधर, सूत्र बताते हैं कि संबंधित कांस्टेबल व इस कारोबार से जुड़े आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाली जाए तो कई खुलासे हो सकते हैं। पूरा मामला पूर्व विधायक के कृषि कुएं से जुड़ा हुआ है इसलिए उच्च स्तर पर इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन एक कांस्टेबल प्रभुराम को बर्खास्त कर एक तरह से मामले का पटाक्षेप कर दिया गया।

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