छुपाए रखा यौन उत्पीडऩ का मामला, शिकायत न मिलती तो और शिकार बनते

- गंभीरता दिखाते तो पखवाड़ेभर पहले ही खुल जाता यह मामला
- यौन उत्पीडऩ जैसे गंभीर मामलों में भी गंभीर नहीं है अस्पताल
सिरोही. यौन उत्पीडऩ जैसे गंभीर मामलों में भी जिला अस्पताल गंभीरता नहीं दिखा रहा। यहां तक कि संज्ञान में आने के बाद भी मामले दबा दिए जा रहे हैं। शहर के निजी हॉस्टल में बच्चों के साथ यौन उत्पीडऩ मामले में इसी तरह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिला अस्पताल में चिकित्सक के पास यह मामला पखवाड़ेभर पहले ही पहुुंच चुका था। इसके बाद भी न तो पुलिस को सूचना दी गई और न प्रशासन के संज्ञान में लाया गया। पीडि़त बच्चे को फौरी तौर पर उपचार कर घर भेज दिया गया। सरकारी सेवारत चिकित्सक ने इस तरह का गंभीर मामला भी एक तरह से दबाए रखा। अब भी गुमनाम शिकायत न मिलती तो न जाने कितने मासूम दरिंदगी का शिकार होते रहते।
चौड़े आई अस्पताल की संवेदनशीलता
शिकायत के बाद मामला खुल तो गया, लेकिन अस्पताल की संवदनशीलता चौड़े आ गई। इस तरह के मामलों में भी यदि गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं तो बच्चों के साथ होने वाले अपराधों पर रोक किस तरह लगेगी, आसानी से सोच सकते है। जिम्मेदार पद पर बैठे चिकित्सक को स्वस्तर पर पुलिस-प्रशासन तक सूचना भेजनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
फिर उपचार कर घर भेज दिया
गुमनाम शिकायत के बाद त्वरित गति से हुई कार्रवाई के दौरान इसकी पुष्टि हुई है। सामने आया कि पखवाड़ेभर पहले एक बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसके परिजन अस्पताल ले गए। चिकित्सक ने जांच के बाद उत्पीडऩ का अंदेशा जताया। परिजनों ने बदनामी के डर से पुलिस में जाने से इनकार कर दिया। तब चिकित्सक ने उपचार कर भेज दिया। मामला ध्यान में आने के बाद भी चिकित्सक ने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी।
गुमनाम शिकायत पर खुला मामला
ज्ञातव्य है कि शहर के आदर्शनगर रोड निजी हॉस्टल में रहने वाले पांच बच्चों का यौन उत्पीडऩ करना सामने आया है। महंगे गिफ्ट देने का प्रलोभन देकर संचालक बच्चों के साथ अनुचित कृत्य व यौन उत्पीडऩ करता था। इस मामले में गुमनाम शिकायत मिलने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बाल कल्याण समिति व पुलिस के साथ एक टीम गठित कर जांच की। त्वरित कार्रवाई में इस हॉस्टल में कई अनियमितताएं मिली। साथ ही पांच बच्चों के साथ यौन उत्पीडऩ व अनुचित कृत्य की पुष्टि हुई।



