मेडिकल जांच के लिए मांगी शराब, मंगवाए बीयर के दस कैन

- पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में भी नहीं दिख रही संवेदनशीलता
- बाल कल्याण समिति सदस्यों के समक्ष ही दो माह में आए दो मामले
सिरोही. पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में जिस तरह की संवेदनशीलता होनी चाहिए, ऐसी यहां नजर नहीं आती। न्याय की देहरी तक पहुंचने से पहले पीडि़त अस्पतालों में भारी परेशानी झेल रहे हैं। मेडिकल जांच के लिए न केवल घंटों तक इंतजार करवाया जा रहा है, वरन् शराब भी मांगी जा रही है। जिला अस्पताल में पिछले दो माह में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। दोनों ही मामले बाल कल्याण समिति सदस्यों के समक्ष भी आ चुके हैं। इसके बावजूद न तो किसी की जिम्मेदारी तय की गई और न किसी पर कार्रवाई हुई।
फिर कैसी कमेटी और कैसी निष्पक्षता
उधर, जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ.वीरेंद्र महात्मा भी इन मामलों में शायद गंभीर नहीं है। यही कारण है कि वे अपनी ओर से केवल कमेटी गठित किए जाने का रटा-रटाया जवाब ही दे रहे हैं। कमेटी में शामिल अधिकारी अपने ही अस्पताल के अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ किस तरह से जांच करेंगे यह सोच सकते है। लिहाजा कमेटी की निष्पक्षता पर ही सवाल उठ रहे हैं। इसकी पुष्टि इसी से हो जाती है कि तीन दिन पहले बनाई कमेटी ने अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
पीडि़ताओं को शाम तक बैठाए रखा
गत मई माह में नाबालिग पीडि़ताओं के मेडिकल मुआयने के लिए बाल कल्याण समिति की ओर से पत्र जारी कर दिया गया था। इस पर कमेटी गठित कर दी गई, लेकिन पीडि़ताओं को पांच से छह घंटे तक बैठाए रखा गया। पीडि़ताओं को सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे जिला अस्पताल लाया गया था, लेकिन शाम सात बजे तक भी जांच नहीं की गई। शाम को बाल कल्याण समिति के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल जांच शुरू की गई। समिति सदस्य एडवोकेट प्रकाश माली को जब इसकी सूचना मिली तो वे तत्काल ही जिला अस्पताल पहुंचे तथा मेडिकल प्रक्रिया शुरू करवाई।
बीयर लाकर दी फिर भी जांच अधूरी छोड़ी
वहीं, तीन दिन पहले शहर के आदर्शनगर रोड पर निजी हॉस्टल में बच्चों के यौन उत्पीडऩ मामले में बीयर के कैन मंगवाने का मामला सामने आया है। पीडि़त बच्चों को जब मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल लाया गया तो यहां बीयर के दस कैन मंगवाए गए। इसके बाद भी जांच अधूरी छोड़ दी। बाल कल्याण समिति सदस्य प्रतापसिंह नून ने बताया कि वे अस्पताल में ही थे। जांच में देरी होने पर उन्होंने समझा कोई औपचारिकता चल रही होगी। फिर पता चला कि मेडिकल जांच करने वाले कार्मिकों ने पुलिसकर्मियों से बीयर मंगवाई है। इसके बाद भी जांच अधूरी छोड़ दी तथा अगले दिन मेडिकल करवाया गया।
जवाब मांग रहे सवाल
- अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए बीयर मांगने वाले कार्मिकों पर कार्रवाई कब तक
- कमेटी गठन के नाम पर कार्मिकों का बचाव करने वालों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं
- बाल कल्याण समिति सदस्यों के समक्ष ही जब ऐसे मामले तो सामान्य दिनों में क्या होगी स्थिति
- पीडि़ताओं को घंटों तक इंतजार करवाने वाले कार्मिकों पर कार्रवाई कब तक
कमेटी गठित की है…
इस तरह का मामला ध्यान में आने पर उसी दिन कमेटी गठित कर दी थी। जांच रिपोर्ट अभी आनी है।
- डॉ. वीरेंद्र महात्मा, पीएमओ, जिला अस्पताल, सिरोही



