
- भीमाना में खनन परियोजना के विरोध में उमड़ा जन सैलाब
- राजनीतिक संरक्षण से अंदरखाने स्वीकृति मिलने का आरोप
सिरोही. पिण्डवाड़ा तहसील के भीमाना गांव में उमड़े जनसैलाब ने समवेत स्वर में कहा कि जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदिवासी पहले ही पहले से ही रोजगार व स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनकी जमीन पर शुरू कर रहे खनन परियोजना से भारी नुकसान का अंदेशा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण अंदरखाने ही खनन परियोजना को स्वीकृति दी जा रही है, जिसे निरस्त किया जाना चाहिए। आदिवासी क्षेत्र में यह परियोजना जल, जीवन व जंगल पर कुठाराघात करने वाली है। ग्रामीणों ने खनन परियोजना के विरोध में यहां रविवार को आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान वाटेरा, भीमाना, भारजा व रोहिड़ा पंचायत क्षेत्र के कई गांवों के लोगों ने एकजुटता से विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने इस परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की। धरने में लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की कृषि भूमि, पर्यावरण और जनजीवन को नष्ट कर देगी, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन जनता और पर्यावरण की रक्षा के लिए है। परियोजना निरस्त नहीं होने पर आगामी दिनों आंदोलन और तेज किया जाएगा।
फिर न जल बचेगा और न रोजगार
धरना स्थल पर पहुंचे हजारों लोगों ने इस खनन परियोजना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि करीब 800 हैक्टेयर क्षेत्र में चूना पत्थर खनन की यह परियोजना शुरू होते ही क्षेत्र के पेड़, पहाड़ और जलस्रोत खत्म हो जाएंगे। आरोप लगाया कि खनन की इस योजना में कई किसानों की खातेदारी भूमि भी शामिल की गई है, जिससे वे अपनी आजीविका खो देंगे।
ग्रामीणों ने लगाए भाजपा नेताओं पर आरोप
ग्रामीणों के धरने में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े प्रतिनिधि व संगठनों के लोग सम्मिलित हुए। इस दौरान भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों की गैर मौजूदगी से ग्रामीणों में नाराजगी नजर आई। प्रधान नितिन बंसल के विरुद्ध तो नारेबाजी तक की गई। ग्रामीणों का आरोप रहा कि वे जनता के हित के मुद्दों से बचने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यह मामला जनता की जमीन और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है, लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष, सांसद व अन्य वरिष्ठ राजनेता जनभावनाओं के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे।
विधायक को झेलना पड़ा जनाक्रोश
धरने पर पहुंचे विधायक समाराम गरासिया को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने पूछा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है तो जनता की आवाज को क्यों नहीं सुना जा रहा। इस खनन परियोजना को रद्द कराने के पुरजोर प्रयास क्यों नहीं किए जा रहे। विधायक ने लोगों को भरोसा दिलाया कि वे जनता के साथ खड़े हैं और उनकी भावना को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।



