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बाबा साहेब और सिरोही राज्य के बीच रहा है गहरा नाता

  • अंतिम समय दिल्ली में सिरोही महाराजा के बंगले में ही गुजरा
  • सरकारी आवास छोड़ते ही इस बंगले में आ गए थे बाबा साहेब

सिरोही. संविधान निर्माता एवं देश के प्रथम विधि मंत्री रहे बाबा साहेब भीमराव रामजी अम्बेडक़र की जयंती 14 अपे्रल को हम धूमधाम से मनाने जा रहे हैं। राजनीतिक दौर में उनका अधिकतर समय दिल्ली में गुजरा एवं वे अंतिम समय तक दिल्ली में ही रहे। वैसे बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि बाबा साहेब का सिरोही राजघराने से गहरा नाता रहा है। उन्होंने जीवन का अंतिम समय सिरोही महाराजा के दिल्ली बंगले में ही गुजारा था। विधि मंत्री के पद से इस्तीफा देने के तत्काल बाद उन्होंने पृथ्वीराज रोड स्थित अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था। सिरोही से जुड़े इतिहासकार उदयसिंह डिंगार बताते हैं कि इसके बाद बाबा साहेब सिरोही महाराजा के शामनाथ मार्ग स्थित बंगले में रहने आए और अंतिम क्षणों तक वे इसी बंगले में रहे। लिहाजा सिरोही राज्य और बाबा साहेब अम्बेडक़र के बीच गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है, जो आज भी इस स्मारक के रूप में जीवित है।

इस तरह महाराजा के बंगले में शिफ्ट हुए
विधि मंत्री रहते समय ही उनके सिरोही राज्य के शासक महाराजा अभयसिंह से घनिष्ठ एवं आत्मीय सम्बंध हो गए थे। गहरी मित्रता के कारण ही बाबा साहेब ने जब सरकारी आवास छोडऩे का फैसला सुनाया तो सिरोही महाराजा ने उन्हें अपने बंगले में रहने का ऑफर दिया। बाबा साहेब ने ऑफर पर विचार किया, लेकिन किराया देने पर अड़ गए। महाराजा ने उनकी बात रखते हुए प्रतीकात्मक राशि लेने की सहमति दी। इसके बाद बाबा साहेब 22 पृथ्वीराज रोड को छोडक़र 26 शामनाथ मार्ग स्थित इस बंगले में शिफ्ट हो गए। अपनी अंतिम सांस उन्होंने इसी बंगले में ली। बाबा साहेब के निधन के बाद उनकी पत्नी डॉ. सविता अंबेडक़र करीब तीन वर्ष तक इसी बंगले में रहीं।

इस्तीफा देते ही छोड़ा सरकारी आवास
माना जा रहा है कि हिंदू कोड बिल को लेकर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से अपनी गंभीर असहमति के कारण उन्होंने 31 अक्टूबर 1951 को कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। अगले ही दिन यानि एक नवम्बर 1951 को उन्होंने सरकारी आवास 22 पृथ्वीराज रोड को पूरी तरह खाली कर दिया और 26 शामनाथ मार्ग, जो पहले अलीपुर रोड के नाम से जाना जाता था उसमें शिफ्ट हो गए। यह बंगला तत्कालीन समय में सिरोही महाराजा की सम्पति रहा है।

फिर सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक बनाया
बताया जा रहा है कि बाद के वर्षों में सिरोही महाराजा ने यह बंगला किसी व्यापारी को बेच दिया। व्यापारी ने आगे इसे किसी स्टील व्यवसायी जिंदल परिवार को बेच दिया। उन्होंने इस बंगले में कुछ बदलाव भी किए। वर्ष-2000 के आसपास देशभर से कार्यकर्ताओं की मांग उठी तो तत्कालीन सरकार ने इस बंगले को स्मारक बनाने पर विचार किया। लोगों की मांग रही कि 26 अलीपुर रोड को बाबा साहेब का स्थायी स्मारक बनाया जाए। इस पर सरकार ने स्टील व्यवसायी जिंदल से इसी क्षेत्र में लगभग उतनी ही जमीन देकर यह बंगला ले लिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने 2 दिसम्बर 2003 को इस बंगले को बाबा साहेब के राष्ट्रीय स्मारक के रूप में देश को समर्पित किया।

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