- बाजार में जो महंगी जांचें वे इनके पास उपलब्ध ही नहीं
- जिला अस्पताल में पटरी से उतरी निशुल्क जांच योजना
सिरोही. राजकीय मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल में निशुल्क जांच योजना पटरी से उतरती नजर आ रही है। यहां कई प्रकार की जांचें समय पर नहीं होने से मरीज भारी समस्या उठा रहे हैं। साथ ही निजी लैब में जेब कटवाने को मजबूर हो रहे हैं। दिलचस्प तो यह है कि अधिकतर वे जांचें ही समय पर नहीं हो रही, जो बाजार में पहले से ही महंगी दर से हो रही है। यानि जिन जांचों में मरीजों को भारी-भरकम राशि चुकानी होती है वे जांचें ही बाहर करवाने की मजबूरी है। इनमें विटामिन बी ट्वेल्व व थायरॉयड जैसी जांचें शामिल हैं। ब्लड सैम्पल देने के बाद जांच रिपोर्ट आने तक का समय मरीज किसी तरह गुजार लेता है, लेकिन दोपहर बाद जब रिपोर्ट हाथ में आती है तब ठगे से रह जाते हंै। इस पर नॉट अवेलेबल का ठप्पा लिखा मिलता है। ऐसे में वापस निजी लैब पर जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता।
बार-बार ब्लड निकालने का बड़ा दर्द
सरकारी असपताल में सैम्पल देने के बाद भी जब रिपोर्ट नहीं आती तब मरीज निजी लैब का रूख करता है। वहां ब्लड सैम्पल देने से लेकर जांच रिपोर्ट आने तक की पूरी प्रक्रिया वापस करनी पड़ती है। इसमें न केवल समय व धन जाया होता है वरन् बार-बार सुई चुभाने व ब्लड निकाले जाने का दर्द झेलना पड़ रहा है।
कम मात्रा में जा रहे किट व केमिकल
बताया जा रहा है कि महंगी जांचों के लिए आवश्यक टेस्ट किट या केमिकल कम मात्रा में आ रहे हैं। इससे अक्सर जांच रिपोर्ट अटक जाती है। लैब में सैम्पल आने के बाद सम्बंधित जांच का किट या केमिकल उपलब्ध नहीं हो तो उसे नॉट अवेलेबल लिख कर रिपोर्ट जारी कर दी जाती है। सूत्र बताते हैं कि इस महीने में ही इस तरह की दो बार समस्या आ चुकी है। गत सप्ताह ही चार दिन तक इस तरह की जांचें नहीं हो पाई है।
ट्वेल्व ऑ क्लॉक के बाद लेते ही नहीं बी ट्वेल्व का सैम्पल
वैसे यह भी दिलचस्प है कि विटामिन बी ट्वेल्व जैसी जांच के लिए मरीज को 12 बजे ही तक सैम्पल देना होता है। इसके बाद अस्पताल की ओपीडी भले ही दो बजे तक सुचारू रहे, लेकिन कोई चिकित्सक लिख भी देगा तो इसकी जांच नहीं हो पाएगी। यह लैब की अपनी व्यवस्था है। बताया जा रहा है कि इस जांच के लिए आवश्यक समय देना होता है एवं 12 बजे बाद कोई टेस्ट लगाया जाता है तो उसकी रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता है। इसके लिए कर्मचारियों को ओपीडी समय के बाद भी बैठना पड़ता है। लिहाजा 12 बजे बाद सैम्पल लेना ही बंद कर देते हैं। जिला अस्पताल में चल रही मनमर्जी की इन व्यवस्थाओं पर न तो शासन स्तर से कोई ध्यान दिया जा रहा है और प्रशासन कोई कदम उठा रहा है।
जांच हो रही है …
ऐसा तो नहीं है जांच हो रही है, आज भी हुई है और कल भी हुई थी।
- डॉ.वीरेंद्र महात्मा, पीएमओ, जिला अस्पताल, सिरोही



