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कृषि प्रधान देश के ग्रामीण शिविरों में कृषि अधिकारी ही नदारद

  • लाभकारी सेवा शिविरों की सार्थकता पर उठ रहे सवाल
  • राज्यमंत्री के तयशुदा कार्यक्रम पर भी अधिकारी नहीं आए

सिरोही. कृषि प्रधान देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही जब कृषि आधारित हो तो इस विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन, ग्रामीण सेवा शिविरों में ही कृषि विभाग के अधिकारी नदारद नजर आ रहे हैं। इनकी गैर मौजूदगी में ग्रामीणों को लाभ कैसे मिलेगा यह आसानी से सोच सकते है। सोमवार को बरलूट ग्राम पंचायत में आयोजित शिविर में ऐसा ही मामला सामने आया। ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने भी शिविर का अवलोकन किया। राज्यमंत्री के आगमन का कार्यक्रम तयशुदा होने के बावजूद कृषि अधिकारी शिविर में नहीं दिखे। ऐसे में कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे शिविरों की सार्थकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

नोटिस देकर तीन दिन में मांगा जवाब
इस मामले में अब शिविर प्रभारी ने सम्बधित अधिकारी को नोटिस जारी किया है। एसडीएम ने कालन्द्री सहायक कृषि अधिकारी दीपककुमार रेबारी को कारण बताओं नोटिस देकर तीन दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें बताया है कि बरलूट में आयोजित शिविर में आपकी उपस्थिति निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए। इससे शिविर कार्यवाही प्रभावित हुई तथा लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

तब तो औपचारिक हो जाएंगे शिविर
आमतौर पर इन सेवा शिविरों में ब्लॉक स्तरीय अधिकारी की ड्यूटी लगाई जा रही है, लेकिन अधिकारी इनमें रुचि नहीं ले रहे। विभागीय कार्यवाही या योजनाओं के प्रचार को लेकर वे शिविर में मातहत कर्मचारियों को भेज रहे हैं। ऐसे में पात्र लोग शिविर में पहुंचने के बाद भी लाभान्वित नहीं हो पा रहे। वहीं, शिविर औपचारिक भी साबित हो सकते हैं।

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