
- पहली बार हुए पशु मेले का आगाज ही बिगड़ा
- मेला स्थल पर खाली नजर आए स्टॉल व पांडाल
सिरोही. मंडार में लीलाधारी महादेव पशु मेले का शनिवार को ध्वजारोहण के साथ आगाज किया गया। जिला प्रशासन एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार हुए इस मेले को लेकर भी न तो किसी में उल्लास दिखा और न आकर्षण नजर आया। यहां तक कि मेला स्थल पर पशु, पशुपालक या किसान भी नगण्य संख्या में ही पहुंच पाए। स्थिति यह रही कि समारोह में अतिथियों को सुनने के लिए मुख्य रूप से कर्मचारी व अधिकारी ही दिखे। रही-सही कसर पिण्डवाड़ा विधायक समाराम गरासिया की उपेक्षा ने पूरी कर दी। नाराजगी के कारण वे कार्यक्रम को बीच में छोडक़र ही निकल गए। माना जा रहा है कि पहली बार पशु मेला आयोजित किए जाने से प्रचार-प्रसार पर जोर देना चाहिए था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि आसपास के क्षेत्र में भी पशुपालक या किसान मेला आयोजन से अनभिज्ञ रहे।
उपेक्षा से नाराज दिखे दो विधायक
विधायक समाराम गरासिया ने अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया। उनका कहना रहा कि वे कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे, लेकिन सम्मान के प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखा गया। वे इस सम्बंध में पशुपालन मंत्री व मुख्यमंत्री को भी जानकारी देंगे। उधर, रेवदर विधायक मोतीराम कोली भी आयोजन को लेकर उपेक्षा का आरोप लगा चुके हैं।
मेले में होंगी कई प्रतियोगिताएं
जिला प्रशासन के अनुसार पशु मेला 11 मार्च तक चलेगा। मेले में गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व अश्व प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। 8 मार्च को ऊंट व ऊंटनी की विभिन्न प्रतियोगिताएं, 9 को अश्व प्रतियोगिता एवं 10 मार्च को अन्य पशुओं की प्रतियोगिता होंगी। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। मेले में उन्नत पशुपालन की तकनीक, टीकाकरण, रोग नियंत्रण एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके लिए कृषि एवं पशुपालन विभाग की स्टॉल सजाई गई है।

गोपूजन से किया मेले का आगाज
उधर, पशु मेले के आगाज पर गोपूजन किया गया। समारोह में पंचायतराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि किसानों व पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। लोक संस्कृति, परंपराएं एवं पशुधन आधारित जीवनशैली हमारी अनमोल धरोहर है। ऐसे पारंपरिक मेले ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं। साथ ही सामाजिक समरसता व सांस्कृतिक विरासत को भी सुदृढ़ करते हैं। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित, जिला कलक्टर अल्पा चौधरी आदि ने विचार व्यक्त किए।



